कोशिश हमारी सच्ची थी


So here's my first attempt at Hindi poetry. Not so good and meaningful but fine for a start. Somehow I liked the Urdu poetry in Ae Dil Hai Mushkil, so I wanted to write something in Hindi or Urdu. Next time I will try in Urdu (huh! that's going to be tough). This one is written as quatrain. 


गलती मैंने की नहीं,
पर सज़ा मैंने पा ली है।
चोट वहा लगी नहीं,
पर ज़ख्म अभी खाली है।

कदम बढ़ाया पहला था,
फिसल गए हम पानी में।
उठके होश संभाला तो,
पाया खुद को बेहाली में।

फिर चलने उठे ही थे,
आवाज़ लगा उसने रोक दिया।
इससे पहले हम कुछ पूछ सके,
मुह अपना उसने मोड़ दिया।

बिना बोले बिना सुने,
फैसला वो कर गए।
तोडा हमे ऐसा उसने,
मिटटी हमे वो कर गए।

पास तो हम कभी थे ही नहीं,
पर दूरी का अब एहसास हुआ।
मिले थे हम कभी नहीं,
पर बिछड़ने का ग़म इस बार हुआ।

हम भी किसी से कम नहीं,
हिम्मत हमारी पक्की थी।
वापस घर को निकल पड़े,
कोशिश हमारी सच्ची थी।

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